Saturday, June 10, 2017

वे मैदान में उतरे तो सब स्वच्छ

बात तब की है, जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता थीं। शशिकला से उनका बहनापा, अपनापा चरम पर था। शशिकला के हर फैसले को जयललिता का फैसला माना जाता था। उनका हर आदेश, मुख्यमंत्री का आदेश माना जाता था

उस समय मोदी जी ने जयललिता को सावधान करते हुए उन्हें शशिकला से बचकर रहने को कहा। जयललिता ने यह सुनकर हर बात पर खुद दृष्टि रखी और मोदीजी की चेतावनी को सही पाया। उसके बाद से ही शशिकला के असीमित अधिकारों पर लगाम कसनी शुरू कर दी गयी। जयललिता व्यक्तिगत रूप से अंत तक मोदी जी का एहसान मानती रहीं

अब आप सोचिये कि कहाँ गुजरात और कहाँ तमिलनाडु! न भाषायी अनुकूलता न पास-पड़ोस का कोई मामला। मोदी जी का ख़ुफ़िया तंत्र किस हद का था कि उन्हें गुजरात में बैठकर जयललिता के घर तक की खबर थी। वे आज जहाँ हैं, यूँ ही नहीं हैं। 

अब आप यह भी सोचिये कि वही मोदी जी आज प्रधानमंत्री हैं। पूरे देश का ख़ुफ़िया तंत्र उनके अधीन है। अब ऐसा क्या होगा जो उन्हें पता नहीं होगा?
राहुल गाँधी या कांग्रेस के छोटे से फ्यूज़्ड दिमाग में  ऐसा कौन सा ढिंचक आईडिया आ जायेगा जिसे मोदी जी जैसा शातिर राजनीतिज्ञ समझ न सके और समझकर काट न सके? मैं तो आसानी से मान पा रही हूँ कि मोदीजी को सब पता था। मध्यप्रदेश में क्या पक रहा है, उत्तरप्रदेश में क्या चल रहा है, सब पर पैनी दृष्टि है उनकी। बस उनकी आदत में नहीं है किसी के फटे में टाँग अड़ाना। मुख्यमंत्री हैं किसलिए यदि प्रदेश भी उन्हें ही चलाना पड़े

बस यही सोचकर उन्होंने भगवान बनकर नैया पार लगाने का आईडिया ड्रॉप कर दिया। लेकिन पप्पू और पप्पुओं को यह होश रहना चाहिए कि हनुमान की पूंछ में आग लगाने का अर्थ यह नहीं है कि राम हार गए। वे मोदी हैं। उत्तर प्रदेश के चुनाव में सामने आ गए थे, आपने अपना हाल देख लिया। अब दोबारा ऐसा कुछ मत करो कि उन्हें फिर से मैदान में उतरना पड़े। क्योंकि जब वे मैदान में उतरते हैं तो फिर सब स्वच्छ करके ही रुकते हैं। 


No comments:

Post a Comment